Hisir
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‘रुतु तेदो आमगे नुतुमतान’ Mundari Song ‘HISIR’ by Dr. Ram Dayal Munda

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रुतु तेदो आमगे नुतुमतान – कवि ‘बुदु बाबू’

रुतु तेदो आमगे नुतुमतान

हेनदे-हेनदेः दुतिआना
उरिः गाइ कोएः गुपि ताना
बिर बितार जोलारेः दुबाकाना
रुतु तेदो आमगेः नुतुम ताना

इचाः बातेः डालिआना
सामाड़ोम तेः मालाकाना
सेर मेंड़ेद होड़ोमो जुलेताना
रुतु तेदो आमगेः नुतुमताना

पारकातेञ लेल केना
इनाते राधाञ हिःआकाना
पुरा चांडुः बिररेः तुराकाना
रुतु तेदो आमगेः नुतुमताना

बुदु बाबुइः काजि ताना
नेकान होड़ो काञ लेलान
सिङ बोेंगा चि बोंगाएः दुबा काना
रुतु तेदो आमगेः नुतुमताना

बाँसुरी (के स्वर) से तुम्हें ही बुलाता है

(शरीर से) सांवला, धोती धारी (छोकरा)
गाय चरा रहा है
वन के भीतर चट्टान पर बैठा है
बाँसुरी से तुम्हें ही बुलाता है

(बालों में) इचा फूल पहना हुआ है
सोने का हार डाले हुए हैं
गर्म लोहे सा शरीर दमकता है
बाँसुरी से तुम्हें ही बुलाता है

(छिपकर) दूसरे देख लिया हूँ
राधा, इसलिए मैं (तुम्हें बुलाने आयी हूँ)
पूर्णमासी का चाँद वन में खिला है
बाँसुरी से तुम्हें ही बुलाता है

बुदु बाबू कहते हैं
ऐसा आदमी मैंने नहीं देखा है
स्वयं भगवान या कोई देवता बैठा है
बाँसुरी से तुम्हें ही बुलाता है

‘हिसिर’ हार (रामदयाल मुण्डा)

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