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‘हुराङ जालोम’ Mundari Story ‘EYA NAWA KANIKO’ by Dr. Ram Dayal Munda, Amita Munda, Nalinee Nag

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ए‘आ नावा कानिको’ सात नई (मुण्डारी) कहानियाँ – लेखक (डॉ. रामदयाल मुण्डा, अमिता मुण्डा, नालिनी नाग)

हुराङ जालोम

ताला निदाआते पारोमाकान नुबाः निदा।

माराङ गाड़ा जापाः रे रोटेआः होड़ोमो डागा-डागा तान लो ताना।

गाड़ा रे दाः लेमकेन-लेमकेन लिंगि ताना।

सेंगेल जुल तान जापाः रे बारिआ होड़ो किनाः उमबुल हुड़िङ खोओन नांगेन लेल जाना।

आ‘र एन तायोम तेदो रोटेआः जाङको लो तानाः ठुल तानाः साड़ि बाआरि सारेः जाना।

गाड़ा रे दाः माणि-माणिते सांगि जाना आ‘र लेल जा लेल जालोःगे रोटेआः तोरोएःआकान होड़ोमो माराङ गाड़ा रे आतु गिड़ि जाना।

मुसिङ सिदा जाकेद लानदा तान-जागार तान हारा राकाब तान, एंगातेआः एसेकार होन रोटे जुगु-जुगु नांगेन बाङगाइः गिड़ि जाना।

एतवार पीटि रेआः दिन।

बुसुःडी रेन पुराः उतार होड़ोको पीटिते को सेनाकाना।

सेणा नोगाकान कोरे जानुमपिड़िआः एसेकार होन रोटे बाआरि सारेःआकाना।

दांगाड़ा चोटेगोः तान लेकाते आएःओ होनाङ एतवार पीटितेः सेनोः लागातिङा

मेनदो हुड़िङ लेका रोगोद नोः तान लेकाते एन हुलाङ ओड़ाः रेगेः ताइन जाना।

ठीकि नेःगे सिंगिः डुमबुइगोः इमताङ बुसुःडी हातु ते दुड़ा ओटाङ जालोः मिआद जीप गाड़ि हिजुः लेना।

हाटिआ होरा जापाः रे आतिङ तान सिमको खादा-खादा तान को आपिर गिड़ि जाना।

आ‘र एन तायोमते गाड़ि माड़ि जाना आ’र आकाड़ा ता रेआः जोजो सुबा रे तिंगु जाना।

तिंगु जान लोःगे गाड़िआते पेनटे सोनोः तुसिङाकान बारिआ होड़ो किन हाड़ागुन जाना।

मोटो नोः निः, लाआइः मोदचोकोएः डुल-डुलाकानिः दो, रामपुर ब्लोक रेन बी.डी.ओ. तानिः आ’र ओड़ोः मिआद निः दो आएआः सोंगे।

‘‘अरे कोई है ?… ओकोए मेना चि ? बी.डी.ओ. सायोब काकालातेः कुलिताना।

तिसिङ दो बी.डी.ओ. सायोब लोः आएआः डइबर दो काएः ताइकेना।

गाड़ि आपान तेगेः चालाओ आउआकादा।

होड़ो को गाड़ि जापाः ते जेताएओ काको होपोरेन जाना।

बी.डी.ओ. सायोब नेसाः हेनसाः दाणा बेड़ा तान लोः रोटे ताकोआः राचाएः तेबाः लाः।

रोटे पारकोम रेः बाटिआ कान ताइकेना।

‘‘अरे कौन है ? उठो और हमारे साथ चलो। हम सरकारी तालाब से मछली पकड़ना चाहते हैं। अरे नहीं समझता है… हाइ गोए चलो।’’

फेंका जाल

आधी रात के बाद की अंधियारी रात।

तजना नदी के किनारे रोटे का शरीर धधक कर जल रहा है।

नदी में पानी उफनकर बह रहा है।

जलती हुई आग के पास दो छायाऐं कुछ देर के लिए दिखाई दी

और कुछ देर के बाद तो सिर्फ रोटे की हड्डियों के जलने और टूटने की आवाज ही रह गई।

धीरे-धीरे नदी में पानी ऊपर आया और देखते ही देखते राख में परिवर्तित शरीर नदी में बह गया।

एक दिन पहले तक हंसता-बतियाता, बढ़ता अपनी मां का एकलौता बेटा रोटे सदा के लिए खो गया।

एतवार-बाजार का दिन।

बुसुःड़ी गांव के अधिकांश लोग बाजार गए हुए हैं।

सयाने लोगों में जनुमपिड़ि बुढ़िया का एकलौता बेटा ही बचा हुआ है।

जवान हो रहा है इसलिए उसे भी एतवार बाजार जाना चाहिए था

लेकिन उसका शरीर ठीक न रहने ही वजह से वह उस दिन घर पर ही रह गया।

ठीक सूर्य डूबने के समय एक जीप धूल उड़ाती हुई बुसुड़ी गांव पहुँची।

उसके साथ ही गांव की गली के पास चरती हुई मुर्गियां शोर मचाती हुई

भाग गई उसके बाद गाड़ी धीमी हुई और गांव के पास एक इमली के पेड़ के नीचे रूक गई।

कुछ मोटा आदमी, जिसका पेट थोड़ा निकला हुआ था, रामपुर ब्लोक का बी.डी.ओ. है और दूसरा उसका साथी।

‘‘ओकोए मेना ची… अरे कोई है ?’’ बी.डी.ओ. साहब ने जोर से आवाज देते हुए कहा।

आज बी.डी.ओ. के साथ उनका ड्राईवर नहीं था, गाड़ी खुद चलाकर आये हैं।

चूँकि लोग बाजार गए हुए थे, गाड़ी के पास कोई नहीं आया।

बी.डी.ओ. साहब इधर-उधर खोजते हुए रोटे के आंगन में पहुँचे।

रोटे खटिया पर लेटा हुआ था।

‘‘ओकोए तानी, दोला अले लोः सेनो। सरकारी बान्दारे हाई को साबेआ।… अरे नहीं समझता है ?… मछली मारने चलो।’’

ए‘आ नावा कानिको (डॉ. रामदयाल मुण्डा, अमिता मुण्डा, नालिनी नाग)

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